सालो रो कर इन आँखों मे रवानी आयी, शायद याद हमे कोई कहानी पुरानी आयी, अरे,खत्म कर दिया मेरे अंदर के बच्चे को, लिख दी तमाम शायरियां तब जा के ये जवानी आयी। -शिवम
मत समझिये इसे खेल के लिख देते है हर रोज़ दिल का हाल, हर रोज़ उसी दर्द के तालाब में गोता लगाना पड़ता है गर लिखना हो जो शेर तो दानिस्ता खुद को जलाना पड़ता है, हर रोज़ उसकी बेफिक्री के हा...
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